Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.12.46: जो व्यक्ति क्षीरसागर के मंथन की इस कथा को नियमित रूप से सुनता या सुनाता है, उसका प्रयत्न कभी भी निष्फल नहीं जाएगा। निःसंदेह, भगवान के गुणों का कीर्तन करना ही इस भौतिक संसार में सभी दुखों को मिटाने का एकमात्र तरीका है। | bhagavat अध्याय 8.12: मोहिनी-मूर्ति अवतार पर शिवजी का मोहित होना । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो व्यक्ति क्षीरसागर के मंथन की इस कथा को नियमित रूप से सुनता या सुनाता है, उसका प्रयत्न कभी भी निष्फल नहीं जाएगा। निःसंदेह, भगवान के गुणों का कीर्तन करना ही इस भौतिक संसार में सभी दुखों को मिटाने का एकमात्र तरीका है।
One who continuously listens to or narrates this story of the churning of the ocean of milk will never be fruitless in his efforts. Undoubtedly, chanting the glories of the Lord is the only means of destroying all suffering in this material world.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥