मात्रा स्वस्रा दुहित्रा वा
नाविविक्तासनो भवेत
बलवान इन्द्रिय-ग्रामो
विद्वांसम अपि कर्षति
"किसी को भी एक महिला के साथ एकांत स्थान पर नहीं रहना चाहिए, भले ही वह उसकी माता, बहन या बेटी ही क्यों न हो, क्योंकि इंद्रियाँ इतनी बेकाबू होती हैं कि एक महिला की उपस्थिति में व्यक्ति उत्तेजित हो सकता है, भले ही वह बहुत ही विद्वान और उन्नत हो।" (भागवत 9.19.17)
