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bhagavat 8.12.32: जैसे ही एक मदोन्मत्त हाथी गर्भावस्था को धारण करने में सक्षम एक मादा हाथी का पीछा करता है, उसी तरह भगवान शिव ने उस सुंदर महिला का पीछा किया और वीर्य का निर्वहन किया, भले ही उनका वीर्य स्खलन कभी व्यर्थ नहीं जाता।   |   bhagavat अध्याय 8.12: मोहिनी-मूर्ति अवतार पर शिवजी का मोहित होना   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 12: मोहिनी-मूर्ति अवतार पर शिवजी का मोहित होना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  8.12.32 
तस्यानुधावतो रेतश्चस्कन्दामोघरेतस: ।
शुष्मिणो यूथपस्येव वासितामनुधावत: ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही एक मदोन्मत्त हाथी गर्भावस्था को धारण करने में सक्षम एक मादा हाथी का पीछा करता है, उसी तरह भगवान शिव ने उस सुंदर महिला का पीछा किया और वीर्य का निर्वहन किया, भले ही उनका वीर्य स्खलन कभी व्यर्थ नहीं जाता।
 
Just as a mad elephant chases a female elephant capable of conceiving, in the same way Lord Shiv was chasing that beautiful woman. Although his semen is not wasted, but on this occasion his semen was ejaculated.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)