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bhagavat 8.11.23: तभी एक अन्य राक्षस नमुचि ने इन्द्र पर हमला किया और उसे पन्द्रह अत्यंत शक्तिशाली, सुनहरे पंखों वाले तीरों से घायल कर दिया, जो जल से भरे बादलों की तरह गरज रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 8.11: इन्द्र द्वारा असुरों का संहार   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 11: इन्द्र द्वारा असुरों का संहार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.11.23 
नमुचि: पञ्चदशभि: स्वर्णपुङ्खैर्महेषुभि: ।
आहत्य व्यनदत्सङ्ख्ये सतोय इव तोयद: ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
तभी एक अन्य राक्षस नमुचि ने इन्द्र पर हमला किया और उसे पन्द्रह अत्यंत शक्तिशाली, सुनहरे पंखों वाले तीरों से घायल कर दिया, जो जल से भरे बादलों की तरह गरज रहे थे।
 
Then another demon, Namuchi, attacked Indra and wounded him with fifteen extremely powerful golden-feathered arrows that roared like clouds filled with water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)