श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  8.1.9 
मनुरुवाच
येन चेतयते विश्वं विश्वं चेतयते न यम् ।
यो जागर्ति शयानेऽस्मिन्नायं तं वेद वेद स: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
श्री मनु ने कहा: ईश्वर ने इस जीवंत भौतिक दुनिया को बनाया है, यह नहीं कि यह भौतिक दुनिया ईश्वर से बनी है। जब सब कुछ शांत होता है, तो ईश्वर एक साक्षी के रूप में जागता रहता है। मनुष्य उसे नहीं जानता, लेकिन वह सब कुछ जानता है।
 
Sri-Manu said: The Supreme Being has created this conscious material world; it is not that He has originated from this material world. When everything is silent, the Supreme Being remains awake as a witness. The living being does not know Him, but He knows everything.
तात्पर्य
यहां ईश्वर और जीवित प्राणियों के बीच एक अंतर है। नित्यो नित्यानां चेतनश चेतनानाम् (कठ उपनिषद 2.2.13)। वैदिक संस्करण के अनुसार, ईश्वर परम शाश्वत, परम जीवित प्राणी है। ईश्वर और साधारण जीवित प्राणी के बीच अंतर यह है कि जब यह भौतिक संसार विनष्ट हो जाता है, तो सभी जीवित प्राणी मौन में, भुला दिए जाने में, एक स्वप्न या अचेतन अवस्था में रहते हैं, जबकि ईश्वर सब कुछ के गवाह के रूप में जागते रहते हैं। यह भौतिक संसार निर्मित होता है, कुछ समय के लिए रहता है, और फिर नष्ट हो जाता है। हालाँकि, इन सभी परिवर्तनों के दौरान, ईश्वर जागते रहते हैं। सभी जीवित प्राणियों की भौतिक स्थिति में स्वप्न के तीन चरण होते हैं। जब भौतिक संसार जागता है और काम के क्रम में रहता है, तो यह एक प्रकार का स्वप्न, एक जाग्रत स्वप्न होता है। जब जीव सो जाते हैं, तो वे फिर से स्वप्न देखते हैं। और जब विनाश के समय बेहोश हो जाते हैं, जब यह भौतिक संसार अप्रकट होता है, तो वे स्वप्न के एक और चरण में प्रवेश करते हैं। इसलिए, भौतिक संसार में किसी भी स्तर पर, वे सभी स्वप्न देख रहे हैं। हालाँकि, आध्यात्मिक दुनिया में, सब कुछ जागृत है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)