Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.1.33: श्री सूत गोस्वामी ने कहा: हे ब्राह्मणों! जब आसन्न मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे परीक्षित महाराज ने शुकदेव गोस्वामी से ऐसा बोलने के लिए प्रार्थना की तो मुनि ने राजा के शब्दों से प्रोत्साहित होकर, राजा का अभिनन्दन किया और वे सुनने के इच्छुक मुनियों की सभा में बड़े आनंद के साथ बोले। | bhagavat अध्याय 8.1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री सूत गोस्वामी ने कहा: हे ब्राह्मणों! जब आसन्न मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे परीक्षित महाराज ने शुकदेव गोस्वामी से ऐसा बोलने के लिए प्रार्थना की तो मुनि ने राजा के शब्दों से प्रोत्साहित होकर, राजा का अभिनन्दन किया और वे सुनने के इच्छुक मुनियों की सभा में बड़े आनंद के साथ बोले।
Sri Suta Goswami said: O Brahmins! When Maharaja Pariksit, who was awaiting his imminent death, requested Sukadeva Goswami to speak thus, the sage, encouraged by the king's words, greeted the king and spoke very happily in the assembly of sages eager to listen.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध आठ के अंतर्गत पहला अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥