श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  8.1.3 
यद्यस्मिन्नन्तरे ब्रह्मन्भगवान्विश्वभावन: ।
कृतवान्कुरुते कर्ता ह्यतीतेऽनागतेऽद्य वा ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
हे विद्वान ब्राह्मण! कृपया हमें उन सभी कार्यों के बारे में बताइए जो इस दृश्य संसार के निर्माता भगवान ने पिछले मन्वंतरों में किए हैं, वर्तमान में कर रहे हैं और भविष्य के मन्वंतरों में करेंगे।
 
O learned Brahmin, kindly describe to us all the activities of the Lord, the creator of this cosmic manifestation, which He has performed in the past Manvantaras, which He is performing at present, and which He will perform in the future Manvantaras.
तात्पर्य
भगवद्गीता में परमेश्वर ने कहा कि युद्ध के मैदान में वह और अन्य जीव पहले भी थे, अब भी हैं और भविष्य में भी बने रहेंगे। भूत, भविष्य और वर्तमान परमात्मा के लिए भी होते हैं और साधारण जीवों के लिए भी। नित्यो नित्यानां चेतनश्चेतनानां (कठ उपनिषद, 2.2.13)। परमात्मा और जीव दोनों ही नित्य और चेतन हैं, लेकिन अंतर ये है कि भगवान अनंत हैं जबकि जीवों की एक सीमा है। परमेश्वर ही सबकुछ का सृजनहार हैं और भले ही जीवों का सृजन नहीं हुआ है लेकिन वे भगवान के साथ हमेशा से हैं, उनका शरीर तो बना है जबकि परमात्मा के शरीर का कभी सृजन नहीं होता। परमात्मा और उनके शरीर में कोई अंतर नहीं है लेकिन जीव नित्य होते हुए भी अपने शरीर से अलग है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)