श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  8.1.29 
देवा वैधृतयो नाम विधृतेस्तनया नृप ।
नष्टा: कालेन यैर्वेदा विधृता: स्वेन तेजसा ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तामस मन्वन्तर में विधृति के पुत्र जो वैधृति कहलाते थे, वे भी देवता हुए। क्योंकि समय के प्रभाव से वैदिक अधिकार नष्ट हो गया था, अतः इन देवताओं ने अपने प्रभाव से वैदिक अधिकार की रक्षा की।
 
O King! In the Tamas Manvantara, the sons of Vidhriti, who were called Vaidhriti, also became deities. Since the Vedic identity had been destroyed with the passage of time, therefore these deities protected the Vedic identity with their strength.
तात्पर्य
तमसा मन्वन्तर में दो प्रकार के देवता थे और उनमें से एक को वैधृति कहा जाता था। देवताओं का कर्तव्य वेदों के अधिकार की रक्षा करना है। देवता शब्द उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो वेदों के अधिकार को वहन करता है, जबकि राक्षस वे हैं जो वैदिक अधिकार का अनादर करते हैं। यदि वेदों का अधिकार खो जाता है, तो पूरा ब्रह्मांड अराजक हो जाता है। इसलिए, देवताओं के साथ-साथ राजाओं और सरकारों के सहयोगियों का कर्तव्य है कि वे वैदिक अधिकार को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करें; अन्यथा मानव समाज एक अराजक स्थिति में होगा जिसमें शांति या समृद्धि नहीं हो सकती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)