Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.1.26: सत्यसेन ने अपने मित्र सत्यजित् के साथ, जो उस काल के स्वर्ग के राजा इन्द्र थे, उन सभी झूठे, अपवित्र और दुराचारी यक्षों, राक्षसों और भूतप्रेतों का वध किया, क्योंकि वे सभी जीवों को कष्ट पहुँचाते थे। | bhagavat अध्याय 8.1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽनृतव्रतदु:शीलानसतो यक्षराक्षसान् ।
भूतद्रुहो भूतगणांश्चावधीत् सत्यजित्सख: ॥ २६ ॥
अनुवाद
सत्यसेन ने अपने मित्र सत्यजित् के साथ, जो उस काल के स्वर्ग के राजा इन्द्र थे, उन सभी झूठे, अपवित्र और दुराचारी यक्षों, राक्षसों और भूतप्रेतों का वध किया, क्योंकि वे सभी जीवों को कष्ट पहुँचाते थे।
Satyasena, along with his friend Satyajit, who was the Indra, the King of Heaven at that time, killed all the false, impure and wicked Yakshas, demons and ghosts and spirits because they caused trouble to all living beings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥