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bhagavat 8.1.22: विभु ब्रह्मचर्य के मार्ग पर चलते हुए आजीवन अविवाहित रहे। उनसे अस्सी हजार अन्य मुनियों ने स्वयं को नियंत्रित रखने, कठोर तपस्या करने और अन्य आचारों का पालन करने की शिक्षा प्राप्त की।   |   bhagavat अध्याय 8.1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 1: ब्रह्माण्ड के प्रशासक मनु  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.1.22 
अष्टाशीतिसहस्राणि मुनयो ये धृतव्रता: ।
अन्वशिक्षन्व्रतं तस्य कौमारब्रह्मचारिण: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
विभु ब्रह्मचर्य के मार्ग पर चलते हुए आजीवन अविवाहित रहे। उनसे अस्सी हजार अन्य मुनियों ने स्वयं को नियंत्रित रखने, कठोर तपस्या करने और अन्य आचारों का पालन करने की शिक्षा प्राप्त की।
 
Vibhu remained celibate and remained unmarried throughout his life. Eighty-eight thousand other sages received teachings related to self-control, penance and other conduct from him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)