ईश्वरः परमः कृष्णः
सच्चिदानन्द-विग्रहः
अनादिर आदिर् गोविन्दः
सर्व-कारण-कारणम्
"भगवान श्रीकृष्ण, जो गोविन्द के नाम से प्रसिद्ध हैं, परम नियंत्रक हैं। उनके लिए शाश्वत, आनंदमय और आध्यात्मिक शरीर है। वह सभी के मूल हैं। उनका कोई और मूल नहीं है क्योंकि वह सभी कारणों का मूल कारण है।" भगवान के अस्तित्व का कोई कारण नहीं है क्योंकि वह सभी कारण हैं। वह हर चीज़ में है (माया ततम इदं सर्वम), वह हर चीज़ में विस्तारित हैं, लेकिन वह सब कुछ नहीं है। वह अचिंत्य-भेदाभेद हैं, एक और अलग दोनों ही हैं। इसे इस श्लोक में बताया गया है। भौतिक स्थिति में, हमारे पास आरंभ, अंत और बीच की धारणा होती है, लेकिन परम भगवान के लिए ऐसी कोई चीज़ नहीं है। सार्वभौमिक ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति विराट-रूप भी है जिसे भगवद् गीता में अर्जुन को दिखाया गया था। इसलिए, क्योंकि भगवान हर जगह और हर समय मौजूद है, वह परम सत्य और महानतम है। वह महानता में पूर्ण हैं। ईश्वर महान हैं, और वह कितने महान हैं, इसे यहाँ समझाया गया है।
