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श्लोक 7.8.6  |
क्रुद्धस्य यस्य कम्पन्ते त्रयो लोका: सहेश्वरा: ।
तस्य मेऽभीतवन्मूढ शासनं किं बलोऽत्यगा: ॥ ६ ॥ |
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| अनुवाद |
| प्रह्लाद, तू है मेरे दुष्ट पुत्र! जब क्रोधित होता हूँ तो तीनों लोक एवं उनके स्वामी भी भयभीत हो जाते हैं, ये तू भली-भाँति जानता है। तो फिर किस शक्ति के बल पर तू इतना दुष्ट हो गया है कि निर्भयता दिखाते हुए तू मेरे शासन के नियमों का उल्लंघन कर रहा है? |
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| प्रह्लाद, तू है मेरे दुष्ट पुत्र! जब क्रोधित होता हूँ तो तीनों लोक एवं उनके स्वामी भी भयभीत हो जाते हैं, ये तू भली-भाँति जानता है। तो फिर किस शक्ति के बल पर तू इतना दुष्ट हो गया है कि निर्भयता दिखाते हुए तू मेरे शासन के नियमों का उल्लंघन कर रहा है? |
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