श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 8: भगवान् नृसिंह द्वारा असुरराज का वध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.8.34 
तत: सभायामुपविष्टमुत्तमे
नृपासने सम्भृततेजसं विभुम् ।
अलक्षितद्वैरथमत्यमर्षणं
प्रचण्डवक्त्रं न बभाज कश्चन ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
अपना सम्पूर्ण तेज और भयावह चेहरे को दिखाते हुए, भगवान नृसिंह अत्यंत क्रोधित हो गए और अपने बल तथा ऐश्वर्य का सामना करने वाला कोई नहीं पाकर सभाभवन में राजा के श्रेष्ठ सिंहासन पर जा बैठे। भय और आज्ञाकारिता के कारण किसी में साहस नहीं हुआ कि सामने आकर भगवान की सेवा करे।
 
अपना सम्पूर्ण तेज और भयावह चेहरे को दिखाते हुए, भगवान नृसिंह अत्यंत क्रोधित हो गए और अपने बल तथा ऐश्वर्य का सामना करने वाला कोई नहीं पाकर सभाभवन में राजा के श्रेष्ठ सिंहासन पर जा बैठे। भय और आज्ञाकारिता के कारण किसी में साहस नहीं हुआ कि सामने आकर भगवान की सेवा करे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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