| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान » अध्याय 8: भगवान् नृसिंह द्वारा असुरराज का वध » श्लोक 25 |
|
| | | | श्लोक 7.8.25  | ततोऽभिपद्याभ्यहनन्महासुरो
रुषा नृसिंहं गदयोरुवेगया ।
तं विक्रमन्तं सगदं गदाधरो
महोरगं तार्क्ष्यसुतो यथाग्रहीत् ॥ २५ ॥ | | | | | | अनुवाद | | तत्पश्चात्, अत्यधिक क्रुद्ध हिरण्यकशिपु ने तीव्र गति से नृसिंहदेव पर अपनी गदा से आक्रमण किया और उन्हें मारना शुरू कर दिया। किन्तु भगवान नृसिंहदेव ने उस महान असुर को, उसकी गदा समेत, वैसे ही पकड़ लिया जैसे गरुड़ किसी बड़े साँप को पकड़ लेता है। | | | | तत्पश्चात्, अत्यधिक क्रुद्ध हिरण्यकशिपु ने तीव्र गति से नृसिंहदेव पर अपनी गदा से आक्रमण किया और उन्हें मारना शुरू कर दिया। किन्तु भगवान नृसिंहदेव ने उस महान असुर को, उसकी गदा समेत, वैसे ही पकड़ लिया जैसे गरुड़ किसी बड़े साँप को पकड़ लेता है। | | ✨ ai-generated | | |
|
|