श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 8: भगवान् नृसिंह द्वारा असुरराज का वध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.8.23 
प्रायेण मेऽयं हरिणोरुमायिना
वध: स्मृतोऽनेन समुद्यतेन किम् ।
एवं ब्रुवंस्त्वभ्यपतद् गदायुधो
नदन् नृसिंहं प्रति दैत्यकुञ्जर: ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
अपने मन में हिरण्यकशिपु ने कहा, "अपार योगशक्ति वाले भगवान विष्णु ने मेरा वध करने के लिए यह युक्ति बनाई है, किंतु इस प्रकार के प्रयास को करने से क्या लाभ है? ऐसा कौन है जो मुझसे युद्ध कर सकता है?" यह सोचकर हाथी के समान हिरण्यकशिपु ने अपनी गदा उठाकर भगवान् पर आक्रमण कर दिया।
 
Hiranyakshipu said to himself: “Lord Viṣṇu, who has great yogic powers, has devised this plan to kill me, but what is the use of making such an effort? Who is there who can fight with me?” Thinking thus, Hiranyakshipu, who was as big as an elephant, raised his mace and attacked the Lord.
तात्पर्य
जंगल में कभी-कभी शेर और हाथियों के बीच लड़ाई होती हैं। यहाँ भगवान एक शेर के रूप में प्रकट हुए हैं, और हिरण्यकश्यपु, भगवान से निडर होकर उनपर एक हाथी की तरह आक्रमण करता हैं। सामान्यतया हाथी शेर से हार जाता है, और इसलिये इस छंद में यह तुलना उपयुक्त है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)