श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 5: हिरण्यकशिपु का साधु पुत्र प्रह्लाद महाराज  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.5.2 
तौ राज्ञा प्रापितं बालं प्रह्लादं नयकोविदम् ।
पाठयामासतु: पाठ्यानन्यांश्चासुरबालकान् ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद महाराज पहले से ही भक्तिभाव के पारखी थे, फिर भी जब उनके पिता ने उन्हें पढ़ाने के लिए शुक्राचार्य के दोनों बेटों के पास भेजा तो उन्होंने उन्हें और अन्य असुरों के बेटों को अपनी पाठशाला में दाखिला दे दिया।
 
Prahlada Maharaja was already accomplished in devotional service, but when his father sent him to the two sons of Sukracharya for instruction, the two enrolled him and the other sons of the demons in their school.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)