श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 4: ब्रह्माण्ड में हिरण्यकशिपु का आतंक  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  7.4.24 
तेषामाविरभूद्वाणी अरूपा मेघनि:स्वना ।
सन्नादयन्ती ककुभ: साधूनामभयङ्करी ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
तब उनके सम्मुख दिव्य वाणी प्रकट हुई जो भौतिक दृष्टि से अदृश्य पुरुष से निकली थी। यह वाणी मेघ के ध्वनि के समान गंभीर थी और अत्यंत प्रोत्साहन देने वाली और सभी प्रकार के भय को दूर करने वाली थी।
 
तब उनके सम्मुख दिव्य वाणी प्रकट हुई जो भौतिक दृष्टि से अदृश्य पुरुष से निकली थी। यह वाणी मेघ के ध्वनि के समान गंभीर थी और अत्यंत प्रोत्साहन देने वाली और सभी प्रकार के भय को दूर करने वाली थी।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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