Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 7.3.8: हिरण्यकशिपु ने बेहद कठोर तपस्या का व्रत ले लिया है। हालाँकि उसकी योजना आपसे छिपी नहीं है, फिर भी जिस तरह हम उसके इरादों को प्रस्तुत कर रहे हैं, कृपया उन्हें सुन लें। | bhagavat अध्याय 7.3: हिरण्यकशिपु की अमर बनने की योजना । bhagavat स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्यायं किल सङ्कल्पश्चरतो दुश्चरं तप: ।
श्रूयतां किं न विदितस्तवाथापि निवेदितम् ॥ ८ ॥
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने बेहद कठोर तपस्या का व्रत ले लिया है। हालाँकि उसकी योजना आपसे छिपी नहीं है, फिर भी जिस तरह हम उसके इरादों को प्रस्तुत कर रहे हैं, कृपया उन्हें सुन लें।
Hiranyakashipu has taken a vow of very difficult penance. Although his plan is not hidden from you, please listen to his intentions as we are presenting them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥