श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 3: हिरण्यकशिपु की अमर बनने की योजना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.3.23 
स तत्कीचकवल्मीकात् सहओजोबलान्वित: ।
सर्वावयवसम्पन्नो वज्रसंहननो युवा ।
उत्थितस्तप्तहेमाभो विभावसुरिवैधस: ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही भगवान ब्रह्मा ने अपने कमंडल से जल छिड़का, हिरण्यकशिपु उठ बैठा। उसके अंग-प्रत्यंग इतने बलवान थे कि वह वज्र के प्रहार को भी सह सकता था। उसकी शारीरिक शक्ति और पिघले सोने के समान शरीर के तेज से वह पूर्ण युवा पुरुष की तरह बाँबी से प्रकट हुआ, जैसे लकड़ी से आग निकलती है।
 
As soon as Brahma sprinkled water on his body from his water pot, Hiranyakashipu sat up. Every part of his body was so strong that he could withstand the blow of a thunderbolt. With such physical strength and physical glow like molten gold, he emerged from the bamboo like a young man in the same way as fire emerges from wood.
तात्पर्य
हिरण्यकशिपु फिर से जीवंत हो गया, ऐसा ही उसका शरीर गदा के प्रहारो को सहने के लिये पूर्णतः समर्थ था। अब वो एक युवा मानव बन गया था जिसका शरीर बहुत मजबूत था व सोने की भाँति चमक रहा था। यह उसकी घोर तपस्या का परिणाम था जिसके कारण उसका पुनर्जन्म हुआ था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)