Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 7.2.20: हिरण्यकशिपु ने कहा: हे माँ, हे बहू और हे भतीजो, तुम लोगों को महान वीर की मृत्यु के लिए शोक नहीं करना चाहिए क्योंकि अपने दुश्मन के सामने वीर की मृत्यु बहुत प्रशंसनीय और वांछनीय होती है। | bhagavat अध्याय 7.2: असुरराज हिरण्यकशिपु । bhagavat स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीहिरण्यकशिपुरुवाच
अम्बाम्ब हे वधू: पुत्रा वीरं मार्हथ शोचितुम् ।
रिपोरभिमुखे श्लाघ्य: शूराणां वध ईप्सित: ॥ २० ॥
अनुवाद
हिरण्यकशिपु ने कहा: हे माँ, हे बहू और हे भतीजो, तुम लोगों को महान वीर की मृत्यु के लिए शोक नहीं करना चाहिए क्योंकि अपने दुश्मन के सामने वीर की मृत्यु बहुत प्रशंसनीय और वांछनीय होती है।
Hiranyakshipu said: O mother, O wife and O nephews, you should not mourn the death of a great warrior, because the death of a warrior in front of his enemy is highly praiseworthy and desirable.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥