द्वंद्वाहतस्य गार्हस्थ्यं
ध्यान-भंगादि-कारणम्
लक्षयित्वा गृही स्पष्टं
सन्यसेद अविचारयन्
इस द्वैत के संसार में पारिवारिक जीवन व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन या ध्यान को नष्ट करने वाला कारण है। इस तथ्य को स्पष्ट रूप से समझते हुए व्यक्ति को संन्यास के नियम को बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार करना चाहिए।
