श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 14: आदर्श पारिवारिक जीवन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.14.16 
यर्ह्यात्मनोऽधिकाराद्या: सर्वा: स्युर्यज्ञसम्पद: ।
वैतानिकेन विधिना अग्निहोत्रादिना यजेत् ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
जब कोई व्यक्ति धन-सम्पत्ति और ज्ञान से संपन्न हो, जो उसके पूर्ण नियंत्रण में हों और जिनके माध्यम से वह यज्ञ कर सके या भगवान को प्रसन्न कर सके, तो उसे शास्त्रों के निर्देशानुसार अग्नि में आहुतियाँ डालनी चाहिए। इस प्रकार उसे भगवान की पूजा करनी चाहिए।
 
जब कोई व्यक्ति धन-सम्पत्ति और ज्ञान से संपन्न हो, जो उसके पूर्ण नियंत्रण में हों और जिनके माध्यम से वह यज्ञ कर सके या भगवान को प्रसन्न कर सके, तो उसे शास्त्रों के निर्देशानुसार अग्नि में आहुतियाँ डालनी चाहिए। इस प्रकार उसे भगवान की पूजा करनी चाहिए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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