श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 13: सिद्ध पुरुष का आचरण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.13.11 
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम् ।
प्रह्रादस्य च संवादं मुनेराजगरस्य च ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
इतिहास के एक उदाहरण के रूप में, ज्ञानी साधु-संत प्रह्लाद महाराज और एक अजगर के समान भोजन करनेवाले महामुनि के बीच हुए प्राचीन संवाद की कहानी सुनाते हैं।
 
As a historical example of this, learned sages tell the story of an ancient conversation that took place between Prahlada Maharaja and a great sage who had the attitude of a python.
तात्पर्य
प्रेहड़ म्हारांज़ ने जिस साधु से भेंट की वह सांप की सी जीवन शैली अपना रहा था जिसे आजगर-वृत्ति कहते हैं। सांप वर्षों तक एक ही स्थान पर बैठता है और जो कुछ भी उसे मिलता है खाता रहता है। प्रेहड़ म्हाराजाँ अपने सहयोगियों के साथ उस महान्‌ साधु के पास गये और उससे इस प्रकार वार्तालाप किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)