श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 12: पूर्ण समाज : चार आध्यात्मिक वर्ग  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.12.19 
वन्यैश्चरुपुरोडाशान् निर्वपेत् कालचोदितान् ।
लब्धे नवे नवेऽन्नाद्ये पुराणं च परित्यजेत् ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
जंगल में जो फल और अनाज अपने आप उगते हैं, वानप्रस्थ को उन्हें पुरोडाश के तौर पर यज्ञ में अर्पित करना चाहिए। जब उसे थोड़ा–बहुत नया अनाज मिल जाए, तो पुराने अनाज को त्याग देना चाहिए।
 
A Vanaprastha should prepare the purodash for offering in the yagya from the fruits and grains grown by himself in the forest. When he gets some new grains, he should give up the old collection of grains.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)