श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 10: भक्त शिरोमणि प्रह्लाद  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.10.8 
इन्द्रियाणि मन: प्राण आत्मा धर्मो धृतिर्मति: ।
ह्री: श्रीस्तेज: स्मृति: सत्यं यस्य नश्यन्ति जन्मना ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
हे भगवान, जन्म के समय से ही काम-वासनाओं के कारण मनुष्य की इंद्रियाँ, मन, जीवन, शरीर, धर्म, धैर्य, बुद्धि, लज्जा, ऐश्वर्य, बल, स्मृति और सच्चाई नष्ट हो जाती है।
 
हे भगवान, जन्म के समय से ही काम-वासनाओं के कारण मनुष्य की इंद्रियाँ, मन, जीवन, शरीर, धर्म, धैर्य, बुद्धि, लज्जा, ऐश्वर्य, बल, स्मृति और सच्चाई नष्ट हो जाती है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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