देवोऽसुरो नरोऽन्यो वा नेश्वरोऽस्तीह कश्चन ।
आत्मनोऽन्यस्य वा दिष्टं दैवेनापोहितुं द्वयो: ॥ ६४ ॥
अनुवाद
मय दानव बोले: जो तक़दीर स्वामी ने अपनी, पराई या दोनों के लिए तय कर दी हो उसे ना तो कोई मिटा सकता है और ना ही उसे कोई बदल सकता है। ऐसा कोई भी नहीं है, चाहे वह देवता हो, दानव हो या कोई और, जो भगवान् की इच्छा के विरुद्ध जा सके।
Maya demon said: Whatever has been decided by God in the fate of one's own or someone else's or both, no one can erase it anywhere, be it a god, a demon, a human being or anyone else.
तात्पर्य
परमेश्वर एक ही हैं - कृष्ण, विष्णुतत्व। कृष्ण स्वयं को विष्णु तत्व के व्यक्तिगत विस्तार (स्वांश) में विस्तारित करते हैं, जो सब कुछ नियंत्रित करते हैं। माया दानव ने कहा, "हालांकि मैं योजना बनाता हूं, आप योजना बनाते हैं या हम दोनों योजना बनाते हैं, लेकिन प्रभु ने योजना बनाई है कि क्या होगा। उनकी मंजूरी के बिना किसी की भी योजना सफल नहीं होगी।" हम अपनी स्वयं की विभिन्न योजनाएं बना सकते हैं, लेकिन जब तक उन्हें परम भगवान, विष्णु की मंजूरी नहीं मिलती, वे कभी भी सफल नहीं होंगी। सभी प्रकार की जीवित इकाइयों द्वारा सैकड़ों और लाखों योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन परम भगवान की मंजूरी के बिना वे व्यर्थ हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥