श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 10: भक्त शिरोमणि प्रह्लाद  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  7.10.60 
सिद्धामृतरसस्पृष्टा वज्रसारा महौजस: ।
उत्तस्थुर्मेघदलना वैद्युता इव वह्नय: ॥ ६० ॥
 
 
अनुवाद
जब राक्षसों के मृत शरीरों ने अमृत का स्पर्श किया, तो उनके शरीर वज्र के समान अजेय हो गए। विशाल शक्ति से लैस होकर वे बादलों से निकलने वाली बिजली की तरह उठ खड़े हुए।
 
जब राक्षसों के मृत शरीरों ने अमृत का स्पर्श किया, तो उनके शरीर वज्र के समान अजेय हो गए। विशाल शक्ति से लैस होकर वे बादलों से निकलने वाली बिजली की तरह उठ खड़े हुए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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