श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 10: भक्त शिरोमणि प्रह्लाद  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  7.10.56 
ततस्ते सेश्वरा लोका उपासाद्येश्वरं नता: ।
त्राहि नस्तावकान्देव विनष्टांस्त्रिपुरालयै: ॥ ५६ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् जब असुरों ने स्वर्गलोक को तहस-नहस करना शुरू कर दिया तो उन लोकों के शासक भगवान शिव की शरण में गए और उन्होंने कहा- हे प्रभु, हम तीनों लोकों के देवता विनष्ट होने वाले हैं। हम आपके अनुयायी हैं। कृपया हमारी रक्षा करें।
 
तत्पश्चात् जब असुरों ने स्वर्गलोक को तहस-नहस करना शुरू कर दिया तो उन लोकों के शासक भगवान शिव की शरण में गए और उन्होंने कहा- हे प्रभु, हम तीनों लोकों के देवता विनष्ट होने वाले हैं। हम आपके अनुयायी हैं। कृपया हमारी रक्षा करें।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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