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bhagavat 7.10.53: नारद मुनि ने कहा: जब देवता, जो भगवान कृष्ण की कृपा से हमेशा शक्तिशाली रहते हैं, ने असुरों से युद्ध किया, तो असुर हार गए और इसलिए उन्होंने सबसे महान राक्षस, माया दानव, की शरण ली।   |   bhagavat अध्याय 7.10: भक्त शिरोमणि प्रह्लाद   ।   bhagavat स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 10: भक्त शिरोमणि प्रह्लाद  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.10.53 
श्रीनारद उवाच
निर्जिता असुरा देवैर्युध्यनेनोपबृंहितै: ।
मायिनां परमाचार्यं मयं शरणमाययु: ॥ ५३ ॥
 
 
अनुवाद
नारद मुनि ने कहा: जब देवता, जो भगवान कृष्ण की कृपा से हमेशा शक्तिशाली रहते हैं, ने असुरों से युद्ध किया, तो असुर हार गए और इसलिए उन्होंने सबसे महान राक्षस, माया दानव, की शरण ली।
 
The sage Narada said: When the supreme demigods, who are always powerful by the mercy of Lord Krishna, fought with the demons, the demons were defeated and therefore they took refuge in the greatest demon, Maya Danava.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)