श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 10: भक्त शिरोमणि प्रह्लाद  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.10.48 
यूयं नृलोके बत भूरिभागा
लोकं पुनाना मुनयोऽभियन्ति ।
येषां गृहानावसतीति साक्षाद्
गूढं परं ब्रह्म मनुष्यलिङ्गम् ॥ ४८ ॥
 
 
अनुवाद
नारद मुनि बोले : महाराज युधिष्ठिर, आप सभी (पाण्डव) अत्यंत भाग्यशाली हैं क्योंकि भगवान श्री कृष्ण आपके महल में एक सामान्य मनुष्य की तरह रहते हैं। महान संत पुरुष इसे अच्छी तरह से जानते हैं, और इसलिए वे लगातार इस घर में आते हैं।
 
नारद मुनि बोले : महाराज युधिष्ठिर, आप सभी (पाण्डव) अत्यंत भाग्यशाली हैं क्योंकि भगवान श्री कृष्ण आपके महल में एक सामान्य मनुष्य की तरह रहते हैं। महान संत पुरुष इसे अच्छी तरह से जानते हैं, और इसलिए वे लगातार इस घर में आते हैं।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas