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श्लोक 7.10.38  |
ताविहाथ पुनर्जातौ शिशुपालकरूषजौ ।
हरौ वैरानुबन्धेन पश्यतस्ते समीयतु: ॥ ३८ ॥ |
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| अनुवाद |
| दोनों ने मानव समाज में फिर से शिशुपाल और दंतवक्र के रूप में जन्म लिया और भगवान से वैसा ही द्वेषपूर्ण व्यवहार जारी रखा। ये वही थे जो तुम्हारी उपस्थिति में भगवान के शरीर में समा गए। |
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| दोनों ने मानव समाज में फिर से शिशुपाल और दंतवक्र के रूप में जन्म लिया और भगवान से वैसा ही द्वेषपूर्ण व्यवहार जारी रखा। ये वही थे जो तुम्हारी उपस्थिति में भगवान के शरीर में समा गए। |
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