| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान » अध्याय 10: भक्त शिरोमणि प्रह्लाद » श्लोक 20 |
|
| | | | श्लोक 7.10.20  | सर्वात्मना न हिंसन्ति भूतग्रामेषु किञ्चन ।
उच्चावचेषु दैत्येन्द्र मद्भावविगतस्पृहा: ॥ २० ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे दैत्यराज प्रह्लाद, मेरी भक्तिभाव में लगा रहनेवाला मेरा भक्त ऊँचे और नीच जीवों में भेदभाव नहीं करता। सभी प्रकार से वह किसी से ईर्ष्या नहीं करता। | | | | हे दैत्यराज प्रह्लाद, मेरी भक्तिभाव में लगा रहनेवाला मेरा भक्त ऊँचे और नीच जीवों में भेदभाव नहीं करता। सभी प्रकार से वह किसी से ईर्ष्या नहीं करता। | | ✨ ai-generated | | |
|
|