श्रीभगवानुवाच
त्रि:सप्तभि: पिता पूत: पितृभि: सह तेऽनघ ।
यत्साधोऽस्य कुले जातो भवान्वै कुलपावन: ॥ १८ ॥
अनुवाद
भगवान बोले: हे परम पवित्र और साधु पुरुष, तुम्हारे पिता और तुम्हारे कुल के अन्य इक्कीस पुरखे तुम्हारे द्वारा पवित्र हुए हैं। क्योंकि तुम इस कुल में उत्पन्न हुए थे, इसलिए तुम्हारे पूरे कुल का उद्धार हो गया है।
The Lord said: O most pure and virtuous person, your father has been purified along with twenty-one forefathers of your family. Since you were born in this family, the entire clan has become pure.
तात्पर्य
ति: सप्तभी: शब्द का अर्थ है कि तीन को सात से गुणा किया जाए। अपने परिवार में कोई चार या पाँच पीढ़ी पीछे तक जा सकता है- अपने परदादा या यहाँ तक कि परदादा के पिता तक जा सकता है- परन्तु क्योंकि भगवान इक्कीस पितरों का उल्लेख करते हैं, इससे संकेत मिलता है कि ये आशीर्वाद अन्य परिवारों तक भी जाता है। वर्तमान परिवार की तुलना में जहाँ उन्होंने जन्म लिया है, वह अन्य परिवार में भी जन्मे होंगे। इस प्रकार जब एक वैष्णव परिवार में जन्म लेता है तो भगवान की कृपा से वह न केवल उस परिवार को पवित्र करता है बल्कि अपने पिछले जन्मों के परिवार को भी पवित्र करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥