श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 10: भक्त शिरोमणि प्रह्लाद  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.10.10 
ॐ नमो भगवते तुभ्यं पुरुषाय महात्मने ।
हरयेऽद्भ‍ुतसिंहाय ब्रह्मणे परमात्मने ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभो, जो षड्ऐश्वर्य से परिपूर्ण हैं, हे परम पुरुष, हे परमात्मा, हे समस्त दुखों के नाश करने वाले, हे अद्भुत नृसिंह रूप में परम पुरुष, मैं आपको सादर प्रणाम करता हूँ।
 
हे प्रभो, जो षड्ऐश्वर्य से परिपूर्ण हैं, हे परम पुरुष, हे परमात्मा, हे समस्त दुखों के नाश करने वाले, हे अद्भुत नृसिंह रूप में परम पुरुष, मैं आपको सादर प्रणाम करता हूँ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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