Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 7.1.14-15: हे राजन्, महाराज पाण्डु के पुत्र महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ के समय स्वयं देखा कि शिशुपाल भगवान कृष्ण के शरीर में विलीन हो गया। इसलिए, आश्चर्यचकित होकर, उन्होंने उस समय वहाँ बैठे महर्षि नारद से इसका कारण पूछा। जब उन्होंने यह प्रश्न पूछा, तो वहाँ मौजूद सभी ऋषियों ने भी उन्हें यह प्रश्न पूछते हुए सुना। | bhagavat अध्याय 7.1: समदर्शी भगवान् । bhagavat स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृष्ट्वा महाद्भुतं राजा राजसूये महाक्रतौ ।
वासुदेवे भगवति सायुज्यं चेदिभूभुज: ॥ १४ ॥
तत्रासीनं सुरऋषिं राजा पाण्डुसुत: क्रतौ ।
पप्रच्छ विस्मितमना मुनीनां शृण्वतामिदम् ॥ १५ ॥
अनुवाद
हे राजन्, महाराज पाण्डु के पुत्र महाराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ के समय स्वयं देखा कि शिशुपाल भगवान कृष्ण के शरीर में विलीन हो गया। इसलिए, आश्चर्यचकित होकर, उन्होंने उस समय वहाँ बैठे महर्षि नारद से इसका कारण पूछा। जब उन्होंने यह प्रश्न पूछा, तो वहाँ मौजूद सभी ऋषियों ने भी उन्हें यह प्रश्न पूछते हुए सुना।
O King, Maharaja Yudhishthira, son of Maharaja Pandu, himself saw Sisupala merging into the body of Lord Krishna during the Rajasuya sacrifice. Therefore, being surprised, he asked the Maharishi Narada, who was sitting there, the reason for this. When he asked this question, all the sages present there also heard this question being asked.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥