श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 9: वृत्रासुर राक्षस का आविर्भाव  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.9.7 
भूमिस्तुरीयं जग्राह खातपूरवरेण
वै ।
ईरिणं
ब्रह्महत्याया रूपं भूमौ प्रद‍ृश्यते ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी ने राजा इन्द्र से बदले में यह वरदान लिया था कि जहाँ कहीं भी गड्ढे होंगे वे समय पर अपने आप भर जायेंगे। इसके बदले में पृथ्वी ने ब्रह्महत्या के पापों का चतुर्थांश स्वीकार कर लिया। उन्हीं पापों के कारण ही हमें पृथ्वी पर अनेक मरुस्थल दिखाई पड़ते हैं।
 
Earth accepted one fourth of the sins of killing a brahmin by taking a boon from King Indra in return that wherever there are pits, they will be filled up automatically in time. Because of those sins, we see many deserts on Earth.
तात्पर्य
क्योंकि रेगिस्तान पृथ्वी की रोगी अवस्था का प्रकटीकरण है, कोई भी शुभ कर्मकांड या अनुष्ठान रेगिस्तान में नहीं किया जा सकता। ऐसा माना जाता है कि रेगिस्तान में रहने के लिए नियत व्यक्तियों को ब्रह्म-हत्या, अर्थात ब्राह्मण की हत्या के पाप का प्रायश्चित्त भोगना पड़ता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)