Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 6.9.53: दध्यञ्च के अजेय सुरक्षा कवच, जिसे नारायण-कवच के नाम से जाना जाता है, को त्वष्टा को दिया गया था, जिन्होंने इसे अपने पुत्र विश्वरूप को दिया, और जिससे तुम्हें भी यह प्राप्त हुआ है। इस नारायण-कवच के कारण, दधीचि का शरीर अब बहुत ही मजबूत हो गया है। इसलिए, तुम्हें जाकर उनसे उनका शरीर माँगना चाहिए।   |   bhagavat अध्याय 6.9: वृत्रासुर राक्षस का आविर्भाव   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 9: वृत्रासुर राक्षस का आविर्भाव  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.9.53 
दध्यङ्‌ङाथर्वणस्त्वष्ट्रे वर्माभेद्यं मदात्मकम् ।
विश्वरूपाय यत्प्रादात् त्वष्टा यत्त्वमधास्तत: ॥ ५३ ॥
 
 
अनुवाद
दध्यञ्च के अजेय सुरक्षा कवच, जिसे नारायण-कवच के नाम से जाना जाता है, को त्वष्टा को दिया गया था, जिन्होंने इसे अपने पुत्र विश्वरूप को दिया, और जिससे तुम्हें भी यह प्राप्त हुआ है। इस नारायण-कवच के कारण, दधीचि का शरीर अब बहुत ही मजबूत हो गया है। इसलिए, तुम्हें जाकर उनसे उनका शरीर माँगना चाहिए।
 
Dadhichi's impenetrable armor called Narayana-kavacha was found by Tvashta who gave it to his son Vishwaroop and from whom you have received it. Due to this Narayana-kavacha, Dadhichi's body is now very strong. So you go and ask for his body from him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)