Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 6.9.5: इसके पश्चात, सोमरस पीने के लिए अभिप्रेत सिर कपींजल [फ्रेंकॉलिन पार्ट्रिज] में बदल गया। इसी तरह, शराब पीने के लिए अभिप्रेत सिर कलविंक [गौरैया] में बदल गया, और भोजन खाने के लिए अभिप्रेत सिर तित्तिर [सामान्य पार्ट्रिज] हो गया।   |   bhagavat अध्याय 6.9: वृत्रासुर राक्षस का आविर्भाव   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 9: वृत्रासुर राक्षस का आविर्भाव  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.9.5 
सोमपीथं तु यत्तस्य शिर आसीत् कपिञ्जल: ।
कलविङ्क: सुरापीथमन्नादं यत् स तित्तिरि: ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
इसके पश्चात, सोमरस पीने के लिए अभिप्रेत सिर कपींजल [फ्रेंकॉलिन पार्ट्रिज] में बदल गया। इसी तरह, शराब पीने के लिए अभिप्रेत सिर कलविंक [गौरैया] में बदल गया, और भोजन खाने के लिए अभिप्रेत सिर तित्तिर [सामान्य पार्ट्रिज] हो गया।
 
Thereafter the head that drank Soma juice turned into a cuckoo, the head that drank liquor turned into a sparrow and the head that ate food turned into a partridge.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)