हे ज्ञानी देवों में सर्वश्रेष्ठ! यह सत्य है कि जब मैं किसी से प्रसन्न होता हूँ, तो उसके लिए कुछ भी पा लेना कठिन नहीं है। लेकिन, एक शुद्ध भक्त, जिसका मन पूर्णतः मुझ पर स्थिर है, वह मेरी भक्ति में लगे रहने के अवसर के अतिरिक्त और कुछ नहीं माँगता।
O wisest of the demigods, although it is true that it is not difficult for anyone to obtain anything when I am pleased, yet a pure devotee, whose mind is fixed exclusively on Me, does not ask Me for anything except the opportunity to remain absorbed in My devotional service.
तात्पर्य
जब देवताओं ने अपनी पूजा पूरी की, वे उत्सुकता से अपने शत्रु वृत्तासुर के मारे जाने का इंतज़ार करने लगे। इसका मतलब यह है कि देवता शुद्ध भक्त नहीं हैं। हालांकि अगर भगवान प्रसन्न हो जाएँ तो आसानी से कोई भी कुछ भी पा सकता है, लेकिन देवता भगवान को प्रसन्न करके भौतिक लाभ की आकांक्षा रखते हैं। भगवान चाहते थे कि देवता अमोघ भक्ति सेवा के लिए प्रार्थना करें, लेकिन इसके बजाय वे अपने शत्रु को मारने का अवसर माँगने के लिए प्रार्थना करते हैं। यही शुद्ध भक्त और भौतिक मंच के भक्त के बीच अंतर है। अप्रत्यक्ष रूप से, भगवान को खेद था कि देवताओं ने शुद्ध भक्ति सेवा के लिए नहीं माँगा था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥