श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 9: वृत्रासुर राक्षस का आविर्भाव  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.9.37 
समविषममतीनां मतमनुसरसि यथा रज्जुखण्ड: सर्पादिधियाम्. ॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
मोहग्रस्त व्यक्ति रस्सी को सांप समझकर डरता है, जबकि समझदार व्यक्ति के लिए रस्सी डर का कारण नहीं होती क्योंकि वह जानता है कि वह केवल रस्सी ही है। उसी तरह, सभी के हृदय में रहने वाले परमात्मा-स्वरूप, आप लोगों की बुद्धि के अनुसार भय या निर्भीकता की भावना पैदा करते हैं, लेकिन आप स्वयं अद्वैत हैं।
 
A person under the influence of illusion considers a rope to be a snake, and thus the rope creates fear in him, but the rope cannot do this to a person with proper intelligence because he knows it to be only a rope. Similarly, in the heart of everyone, you, in the form of God, create a feeling of fear or fearlessness according to their intelligence, but you yourself are non-dual.
तात्पर्य
भगवद्गीता (4.11) में भगवान कहते हैं, ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथाइव भजाम्य अहम्: "जैसे कोई मेरी शरण में आता है, मैं उसे उसी प्रकार से पुरस्कृत करता हूँ।" भगवान सर्वोच्च व्यक्तित्व सभी चीजों के भंडार हैं, जिसमें सभी ज्ञान, सभी सत्य और सभी विरोधाभास शामिल हैं। यहाँ दिया गया उदाहरण बहुत उपयुक्त है। एक रस्सी एक सत्य है, लेकिन कुछ लोग इसे साँप समझ लेते हैं, जबकि अन्य इसे एक रस्सी समझते हैं। इसी तरह, जो भक्त भगवान श्री हरि को जानते हैं, वे उनमें विरोधाभास नहीं देखते हैं, लेकिन जो भक्त नहीं हैं वे उन्हें सभी भय के सर्प-स्रोत के रूप में मानते हैं। उदाहरण के लिए, जब नृसिंहदेव प्रकट हुए, तो प्रह्लाद महाराज ने भगवान को सर्वोच्च शांति के रूप में देखा, जबकि उनके पिता, जो एक दानव थे, उन्हें परम मृत्यु के रूप में देखते थे। जैसा कि श्रीमद-भागवतम (11.2.37) में कहा गया है, भयं द्वितीयभिनिवेशतः स्यात: द्वैत में तल्लीन होने से भय उत्पन्न होता है। जब कोई द्वैत के ज्ञान में होता है, तो वह भय और आनंद दोनों को जानता है। वही सर्वोच्च भगवान भक्तों के लिए आनंद का स्रोत है और अज्ञानियों के लिए भय जो ज्ञान का खराब भंडार है। भगवान एक हैं, परन्तु लोग पूर्ण सत्य को दृष्टिकोण के विभिन्न कोणों से समझते हैं। मूर्ख लोग उनमें विरोधाभास देखते हैं, परन्तु सज्जन भक्तों को कोई विरोधाभास नहीं मिलता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)