देव-लोकात् पितृ-लोकात्
निरायाच्चापि यत् परम्
तिसृभ्यः परमं स्थानं
वैष्णवं विदुषां गतिः
वहां विभिन्न ग्रह प्रणालियां हैं, जिन्हें देवलोक (देवताओं के ग्रह), पितृलोक (पिताओं का ग्रह) और निरय (नारकीय ग्रह) के रूप में जाना जाता है। जब कोई व्यक्ति इन विभिन्न ग्रह प्रणालियों को पार कर जाता है और वैष्णवलोक में प्रवेश करता है, तो वह वैष्णवों का परम विश्राम स्थल प्राप्त कर लेता है। वैष्णवों का अन्य ग्रह प्रणालियों से कोई लेना-देना नहीं है।
