स एव हि ददौ भागं परोक्षमसुरान् प्रति ।
यजमानोऽवहद् भागं मातृस्नेहवशानुग: ॥ ३ ॥
अनुवाद
यद्यपि वह देवताओं के नाम पर यज्ञ की अग्नि में घी चढ़ा रहा था, परंतु उसने देवताओं को बिना बताए असुरों के नाम से भी आहुतियाँ डालीं। ऐसा उसने इसलिए किया क्योंकि असुर उसकी माता के द्वारा उससे संबंधित थे।
Though he was offering ghee in the sacrificial fire in the name of the gods, without the gods knowing it he was also offering sacrifices in the name of the demons because they were relatives on his mother's side.
तात्पर्य
दैत्यों और देवताओं को विशवरूप के प्रति स्नेह ने दोनों राजवंशों का निर्माण किया जिससे उन्होंने भगवान को प्रसन्न किया। जब उन्होंने असुरों की तरफ से अग्नि में होम किया तो देवताओं की जानकारी के बिना ही किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥