Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.9.28: श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा कि, हे राजन! जब देवताओं ने उनकी स्तुति की तो उनके भीतर भगवान हरी, शंख, चक्र और गदा धारण करके, पहले उनके हृदय में फिर उनके सामने प्रकट हुए। | bhagavat अध्याय 6.9: वृत्रासुर राक्षस का आविर्भाव । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीशुक उवाच
इति तेषां महाराज सुराणामुपतिष्ठताम् ।
प्रतीच्यां दिश्यभूदावि: शङ्खचक्रगदाधर: ॥ २८ ॥
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा कि, हे राजन! जब देवताओं ने उनकी स्तुति की तो उनके भीतर भगवान हरी, शंख, चक्र और गदा धारण करके, पहले उनके हृदय में फिर उनके सामने प्रकट हुए।
Sri Shukdeva Goswami said, "O King! When all the gods prayed to him, Sri Bhagwan Hari appeared first in his heart and then in front of him, holding a conch, a discus and a mace.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥