Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.9.24: सृष्टि के आरम्भ में प्रबल हवा से बाढ़ के पानी में उजाड़ू लहरें उठने लगीं। इनसे इतना भयानक शोर हुआ कि ब्रह्माजी अपने कमल-आसन से प्रलय के पानी में लगभग गिर ही पड़े, लेकिन भगवान् की सहायता से वे बच गए। उसी तरह हम भी भगवान् से इस खतरनाक स्थिति से अपनी रक्षा की आशा करते हैं। | bhagavat अध्याय 6.9: वृत्रासुर राक्षस का आविर्भाव । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरा स्वयम्भूरपि संयमाम्भ-
स्युदीर्णवातोर्मिरवै: कराले ।
एकोऽरविन्दात् पतितस्ततार
तस्माद् भयाद्येन स नोऽस्तु पार: ॥ २४ ॥
अनुवाद
सृष्टि के आरम्भ में प्रबल हवा से बाढ़ के पानी में उजाड़ू लहरें उठने लगीं। इनसे इतना भयानक शोर हुआ कि ब्रह्माजी अपने कमल-आसन से प्रलय के पानी में लगभग गिर ही पड़े, लेकिन भगवान् की सहायता से वे बच गए। उसी तरह हम भी भगवान् से इस खतरनाक स्थिति से अपनी रक्षा की आशा करते हैं।
At the beginning of creation, the strong winds caused terrible waves to rise in the flood waters. These created such a terrifying noise that Lord Brahma almost fell from his lotus seat into the deluge waters, but he was saved with the help of the Lord. In the same way, we also expect protection from the Lord from this terrible situation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥