समश्रिता ये पद-पल्लव-प्लवं
महत-पदं पुण्य-यशो-मुरारेः
भवम्बुधिर वत्स-पदं परं पदं
पदं पदं यद विपदां न तेषां
प्रभु के कमल चरण एक अविनाशी नाव हैं, और अगर कोई उस नाव का आश्रय लेता है तो वह आसानी से अज्ञानता के समुद्र को पार कर सकता है। नतीजतन, एक भक्त के लिए कोई खतरा नहीं है, हालांकि वह इस भौतिक दुनिया में रहता है, जो हर कदम पर खतरों से भरा है। व्यक्ति को अपनी स्वयं की गढ़ी हुई विचारों द्वारा संरक्षित होने की कोशिश करने के बजाय सर्वशक्तिमान की शरण लेनी चाहिए।
