येनावृता इमे लोकास्तपसा त्वाष्ट्रमूर्तिना ।
स वै वृत्र इति प्रोक्त: पाप: परमदारुण: ॥ १८ ॥
अनुवाद
उस अति भयानक असुर ने, जो कि त्वष्टा का ही पुत्र था, अपने तपोबल के ज़रिए सभी लोकों को ढक दिया था। इसीलिए उसका नाम वृत्र पड़ा, जो हर चीज़ को ढकने वाला था।
That extremely fearsome demon, who was actually the son of Tvashta, had covered all the worlds with his austerity. Therefore, he was called Vrittra, i.e. the one who covers everything.
तात्पर्य
वेदों में कहा गया है, 'स इमाँल्लोकान् आवृणोत् तद्- वृत्रस्य वृत्रत्वम्': क्योंकि राक्षस ने सभी लोक-व्यों का आवरण कर लिया था, इसलिए उसका नाम वृत्रासुर हुआ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥