हतपुत्रस्ततस्त्वष्टा जुहावेन्द्राय शत्रवे ।
इन्द्रशत्रो विवर्धस्व मा चिरं जहि विद्विषम् ॥ ११ ॥
अनुवाद
विश्वरूप के वध के पश्चात्, उसके पिता त्वष्टा ने इन्द्र के विरूद्ध अनुष्ठान किए। उन्होंने अग्नि में आहुतियाँ देते हुए कहा, " हे इन्द्र के शत्रु! तुम बढ़ते रहो और बिना विलम्ब किए अपने शत्रु का नाश करो।"
After the killing of Vishwaroop, his father Tvashta performed rituals to kill Indra. He offered oblations in the fire by saying, “O enemy of Indra! May you prosper, you should kill your enemy immediately.”
तात्पर्य
त्वष्टा के मंत्रोच्चार में कुछ दोष था क्योंकि उसने इसे छोटे के स्थान पर लंबा उच्चारण किया, और इसलिए अर्थ बदल गया। त्वष्टा का इरादा "इंद्र-शत्रो" शब्द का उच्चारण करने का था, जिसका अर्थ "हे इंद्र के शत्रु" है। इस मंत्र में, "इंद्र" शब्द अधिकारवाचक विभक्ति (षष्ठी) में है, और "इंद्र-शत्रो" शब्द को "तत्पुरुष समास" (तत्पुरुष-समास) कहा जाता है। दुर्भाग्य से, मंत्र को छोटा उच्चारण करने के बजाय त्वष्टा ने इसे लंबा उच्चारण किया, और इसका अर्थ "इंद्र का शत्रु" से बदलकर "इंद्र, जो एक शत्रु है" हो गया। परिणामस्वरूप इंद्र के शत्रु के बजाय वृत्रासुर का शरीर सामने आया, जिसका इंद्र शत्रु था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥