Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.8.7: तब उसको चाहिए कि बारह अक्षरों वाले इस मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का क्रम पूर्ववत जप करे। इस मंत्र के बारह अक्षरों को दाहिने हाथ की तर्जनी से आरम्भ कर बाएँ हाथ की तर्जनी तक प्रत्येक अँगुली के छोर पर प्रत्येक अक्षर का उच्चारण करते हुए रखता हुआ आप जप करे। शेष चार अक्षरों को अँगूठों के पोरों पर रखे। | bhagavat अध्याय 6.8: नारायण-कवच । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
करन्यासं तत: कुर्याद् द्वादशाक्षरविद्यया ।
प्रणवादियकारान्तमङ्गुल्यङ्गुष्ठपर्वसु ॥ ७ ॥
अनुवाद
तब उसको चाहिए कि बारह अक्षरों वाले इस मंत्र (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का क्रम पूर्ववत जप करे। इस मंत्र के बारह अक्षरों को दाहिने हाथ की तर्जनी से आरम्भ कर बाएँ हाथ की तर्जनी तक प्रत्येक अँगुली के छोर पर प्रत्येक अक्षर का उच्चारण करते हुए रखता हुआ आप जप करे। शेष चार अक्षरों को अँगूठों के पोरों पर रखे।
Then he should chant the twelve letter mantra (Om Namo Bhagavate Vasudevay). Starting from the index finger of the right hand to the index finger of the left hand, place the twelve letters of this mantra on the tip of each finger while pronouncing each letter. Keep the remaining four letters on the tips of the thumbs.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥