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श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 8: नारायण-कवच  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.8.38 
इमां विद्यां पुरा कश्चित्कौशिको धारयन् द्विज: ।
योगधारणया स्वाङ्गं जहौ स मरुधन्वनि ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
हे देवराज! पूर्वकाल में कौशिक नामक एक ब्राह्मण हुआ जिसने इस कवच का प्रयोग किया और योगबल से मरुभूमि में प्राण त्याग दिये।
 
O Devendra! In ancient times, a Brahmin named Kaushik used this armor and with his yogic powers, he deliberately gave up his body in the desert.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)