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bhagavat 6.8.35: विश्वरूप ने आगे कहा- हे इन्द्र! मैंने तुम्हें नारायण के इस गूढ़ कवच के बारे में बताया है। तुम इस सुरक्षा प्रदान करने वाले कवच को पहनकर असुरों के नेताओं पर विजय प्राप्त करने में ज़रूर सफल होगे।   |   bhagavat अध्याय 6.8: नारायण-कवच   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 8: नारायण-कवच  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.8.35 
मघवन्निदमाख्यातं वर्म नारायणात्मकम् ।
विजेष्यसेऽञ्जसा येन दंशितोऽसुरयूथपान् ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
विश्वरूप ने आगे कहा- हे इन्द्र! मैंने तुम्हें नारायण के इस गूढ़ कवच के बारे में बताया है। तुम इस सुरक्षा प्रदान करने वाले कवच को पहनकर असुरों के नेताओं पर विजय प्राप्त करने में ज़रूर सफल होगे।
 
Vishwaroop further said- O Indra! I have told you about this secret armor of Narayana. By wearing this protective armor, you will definitely be able to defeat the leaders of the demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)